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गुरुवार, 10 नवंबर 2016

सेब खाने के 8 टॉप फायदे - BENEFITS OF APPLE

 सेब खाने के 8 टॉप फायदे
( हर मौसम में फायदेमंद है सेब )
1) दाँतों को मजबूत और सफ़ेद बनाता है-
रोजाना एक सेब चबाने से दाँत मजबूत होते हैं क्यूंकि सेब मुँह में लार(saliva) की मात्रा को बढ़ाता है और दाँतों से बैक्टीरिया हटाने में मदद करता है जिससे दाँत सुरक्षित रहते हैं।
2) मानसिक बिमारियों से लड़ने में सहायक-
सेब अन्जाइमर जैसे बहुत सारी मानसिक बिमारियों से लड़ने की ताकत प्रदान करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार रोजाना सेब का जूस पीने से दिमाग को पोषण मिलता है और दिमाग तेज होता है।
3) कैंसर से बचाता है-
सर्वे की मानें तो सेब रोजाना सेवन करने से कैंसर की आशंका 23% तक कम हो जाती है| सेब खाने से जिगर, पेट और स्तन को कैंसर के विरुद्ध लड़ने की शक्ति मिलती है।
4) डायबिटीज़ से मुक्ति –
जो लोग मधुमेह के मरीज हैं उनके लिए तो सेब वरदान समान है। सेब में घुलनशील फाइबर होते हैं जो शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल रखते हैं। रोजाना अगर 2 सेब खाएं तो डाइबिटीज की आशंका कम हो जाती है और आप पहले से अच्छा महसूस करेंगे।
5) कोलेस्ट्रॉल को घटाता है –
जो लोग ज्यादा मोटापे की वजह से परेशान रहते हैं और अपना वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए ये खास खबर है कि सेब शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है। सेब में पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर मोटापे को घटाने में मदद करता है।
6) हृदय(Heart) स्वस्थ रहता है –
सेब खाना ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक है, ये दिल के रक्तचाप को नार्मल रखता है। सेब के छिलके में phenolic compound नाम का यौगिक पाया जाता है जो धमनियों में जमने वाले कचरे को साफ़ करके धमनियों में खून के प्रवाह को सुगम बनाता है। अगर धमनियों में कुछ कचरा जम जाये तो दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है। तो सेब खाना दिल के लिए भी अच्छा है।
7) दस्त और कब्ज से मुक्ति –
सेब में पाया जाने वाला फाइबर दस्त में काफी लाभदायक है। फाइबर आपके शरीर में मौजूद पानी को सोख लेता है या उसे बाहर निकाल देता है जिससे दस्त और कब्ज जैसी बिमारियों से आसानी से मुक्ति मिलती है।
8) मोतियाबिंद को रोकने के सहायक –
रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग ऐसे फलों का रोज सेवन करते हैं जिनमे antioxidants पाया जाता है -जैसे सेब, उनमें मोतियाबिंद होने की सम्भावना 0 से 15 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
तो दोस्तों सेब ऐसा फल है जिसके अंदर हजारों बिमारियों से लड़ने की शक्ति है। रोजाना 1 या 2 सेब का सेवन आपके इम्यून सिस्टम यानि रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। सेब का सेवन कितना जरुरी है उम्मीद है आप लोगों की समझ में आया होगा।

Other more Benefits of Apple

 सेब पोष्टिक तत्वो का घर है। सेब खाना कुछ रोगो को रोकने और इलाज करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह शरीर के समग्र स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में मदद करता है। नीचे सेब के कुछ स्वास्थ्य लाभ सूचीबद्ध हैः
1) एप्पल उन लोगो के लिए एक बढ़िया विकल्प है जो वजन कम करना चाहते है चूंकि यह अतिरिक्त कैलोरी को खाने में शामिल किये बिना भूख को शांत करता है। इसमें पैक्टिन शामिल है जो मानव शरीर की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित वसा की मात्रा को नियंत्रित करता है। इसलिए सेब का सेवन अपने पेट को भरने के लिए एक अच्छा विकल्प है जब आप भोजन के लिए तड़प रहे हो।
2) सेब में पाया जाने वाला पेक्टिन ग्लेक्टरोनिक एसिड का एक स्त्रोत है। यह शरीर में इंसुलिन की जरूरत पर प्रतिबंध लगाता है और इस प्रकार मधुमेह के प्रबंधन में मदद करता है।
3) सेब में एंटीऑक्सीडेंट जैसे कि फ्लेवानॉयड और फ्लोराड्जिन शामिल होते है जो महिलाओं को रजोनिवृति की स्थिति में पहुंचने पर ऑस्टियोपोरोसिस से रक्षा करता है। इसके अलावा, यह अस्थि घनत्व को बढ़ाता है और उन्हें मजबूत बनाने में मदद करता है।
4) हम सभी को हमारे आहार में फाइबर के महत्व के बारे में जानना चाहिए। सेब दोनों घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का एक अच्छा स्रोत है। यह पाचन की प्रक्रिया को विनियमित करने में मदद करता है और कब्ज से राहत देता है। इसके अलावा, सेब का छिलका
5) शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि सेब का छिलका उतारे बिना उन्हे खाना चाहिए वरना सेव से फाइबर का लाभ प्राप्त करने में असमर्थ होगे।
6) सेब गुर्दे की पथरी को बनने से रोकने में मदद करता है चूंकि इसमें साइडर सिरका अच्छी मात्रा में होता है।
7) अपने आहार में सेब को शामिल करने से आप का हृदय स्वस्थ रहता है। सेब में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट एलडीएल कोलेस्ट्रोल के ऑक्सीडाइजेशन को रोकता है और सूजन को कम करता है। इसके अलावा, यह कॉलेस्ट्रोल के स्तर को भी कम करता है।
8) सेब मस्तिष्क बिमारियों जैसे कि अल्जाइमर की रोकथाम करने में भी उपयोगी है क्योंकि यह मुक्त रेडिकल डेमेज से मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करता है जो अल्जाइमर का कारण बनती है।
सेब फ्लेवोनॉयड क्यूरसेटिन और नरीन्जिन की मात्रा उच्च होती है जो 50 प्रतिशत तक फेफड़ो के कैंसर को होने से रोकती है।
9) सेब उर्जा का एक बहुत अच्छा स्रोत है चूंकि यह फेफड़ो के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति में मदद करता है। इसलिए, आपको वर्कआउट करने से पहले कुछ सेब खाने की सलाह दी जाती है। यह आपकी क्षमता को बढ़ाता है और आपकी उर्जा के स्तर में भी वृद्धि लाता है।
इन स्वास्थ्य लाभों के अलावा, सेब में मिनरल और विटामिन प्रचुर मात्रा में होती है जो रक्त को साफ करते है। अतः अच्छा स्वास्थ्य के लिए अपने आहार में सेब को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
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गोमती चक्र एक समाधान अनेक - GOMTI CHAKRA EK SAMADHAN ANEK


जीवन में हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है कुछ परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं जबकि कुछ समस्याओं के निदान के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं तंत्र शास्त्र के माध्यम से जीवन
की कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है-गोमती चक्र(GomatiChakra)एक ऐसा पत्थर है जिसका
उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका यह
बहुत प्रभावशाली है-जो लोग तंत्र या मन्त्र या यंत्र पे विश्वाश नहीं करते है मेरा उनसे निवेदन है की वो लोग
इस पोस्ट को इग्नोर करे।
गोमती चक्र कीउत्पत्ति रहस्य :
गोमती चक्र की उत्पत्ति भगवान् विष्णु के चक्र से उस समय हुई जब देव दानव दोनों मिल कर समुद्र मन्थन करने लगे-पृथ्वी उसके भयंकर
रगड़ एवं गर्जना से उत्तप्त हो गई-रोती बिलखती गाय के रूप में वह भगवान विष्णु की शरण में गयी-भगवान विष्णु ने अपने चक्र से समुद्र
में ऐसी भयंकर चक्रवाती गोलाकार तरंग उत्पन्न किया कि मन्दराचल उसी में फँसकर अत्यंत तीव्र गति से पृथ्वी से ऊपर उठकर घूमने लगा
इस चक्र को ही भँवर कहा गया है-इस भँवर में फँसकर बड़े बड़े जलपोत डूब जाते है इस भयंकर वेग से मन्दराचल के निचले सतह से अनेक
पत्थर लावा बनकर बाहर छिटकने लगे तथा अनेक मणियाँ, बहुमूल्य धातुएँ तथा अन्य वस्तुएं जैसे शङ्ख आदि भी छिटक कर बाहर गिरने
लगे.
कुछ अति कीमती रत्न, पत्थर आदि घर्षण से पिघल तो गए किन्तु ऊपर पानी के सतह पर आते ही ठन्डे पड़ने लगे जो भँवर की अबाध तीव्र
गति के कारण गोल रूप लेते चले गये-इनकी संख्या धीरे धीरे इतनी ज्यादा बढ़ गई कि भँवर हल्का पड़ने लगा और अंत में समुद्र मन्थन को 
रोकना पड़ गया.
तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं मे एक ऐसे दिव्य पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में बहुत ही साधारण होता है लेकिन इसका
प्रभाव असाधारण होता है तंत्र शास्त्र के ज्ञाता इस पर अनेक विधि पूजन कर इसे प्राणप्रतिष्ठा से विशेष सिद्धि दायक बना देते हे.

वरुण (जल) के निचले सतह-पेंदे और गो रूप धारिणी माता पृथ्वी के ऊपरी सतह के मध्यवर्ती रत्न-धातु आदि “गो मृत्तिका” या “गो मिटटी” या
गोमती चक्र के नाम से जाने गये-रहस्य विज्ञान के प्रवर्तक वरुण देव(जल)के घर्षणमय रासायनिक संयोग के कारण इसके अंदर शक्तिशाली 
अतिविचित्र शक्तियों का समावेश हो गया और 'गोमाता' पृथ्वी के आशीर्वाद से इसमें धनसंम्पदा आदि प्रदान करने की शक्तियाँ भी समाविष्ट
हो गईं-गोमती चक्र एक अत्यंत शक्तिशाली उग्र रासायनिक प्रभाव वाला जल से उत्पन्न प्राकृतिक पदार्थ है जिसका नियम से और जिसके लिये
उपयुक्त है वह प्रयोग करे तो अनेक विघ्न बाधा से निश्चित मुक्ति मिल सकती है


गोमती चक्र के साधारण तंत्र उपयोग इस प्रकार हैं :

मानसिक शांति ,रोग और भय से मुक्ति,दरिद्रता से मुक्ति,कोर्ट कचेरी के मामलो मे राहत,भुत-प्रेत बाधा शत्रुपीड़ा,संतान प्राप्ति और खास कर 
धन संचय में-इसकी सिद्धि के विषय में अनेको मत-मतान्तर देखे जाते है कुछ इसे स्वयं सिद्ध बताते है तो कही इसकी सिद्धि के निर्देश मिलते है
होली,दीवाली तथा नवरात्र आदि प्रमुख त्योहारों पर गोमती चक्र की विशेष पूजा की जाती है-ग्रहण या अमावस्या भी महत्त्वपूर्ण और सिद्धि दायक
माने जाते है.

अन्य विभिन्न मुहूर्तों के अवसर पर भी इनकी पूजा लाभदायक मानी जाती है जैसे-गुरुपुष्य योग,सर्वसिद्धि योग तथा रविपुष्य योग पर इनकी 
पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है-खासकर मारण,संमोहन,वशीकरण,स्तम्भन,उच्चाटन जैसे प्रयोग में और व्यापार वृद्धि,अचल-
स्थिरलक्ष्मी,शत्रु भय,पीड़ा,देह व्याधि,दुस्वप्न जैसे विषयों में इसका प्रयोग अत्यंत प्रभावी देखा गया है लेकिन अभिमंत्रित करने से गोमती चक्र का 
प्रभाव सौ गुना बढ़ जाता है.

गोमती चक्र के प्रयोग :

सबसे पहले ये बताना उचित समझता हूँ कि आप जान ले कि गोमती चक्र क्या है-ये गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर
है जो गोमती नदी मे मिलता है-विभिन्न तांत्रिक कार्यो तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। 

असाध्य रोगों को दुर करने तथा मानसिक शान्ति प्राप्त करने के लिये लगभग 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल देना चाहिऐ
तथा सुबह उस पानी को पी जाना चाहिऐ-इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दुर होते है। 

यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़
दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे। 

प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें-निश्चय ही प्रमोशन
के रास्ते खुल जाएंगे। 

यदि गोमती चक्रको लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।  

यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में "हलूं बलजाद" कहकर फेंद दें-इश्वेर चाहेगा तो धीरे-धीरे ये 
मतभेद समाप्त हो जाएगा। 

गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें-आपका शत्रु भी मित्र बन
जाएगा। 

यदि किसी का स्वास्थ्य अधिक खराब रहता हो अथवा जल्दी-जल्दी अस्वस्थ होता हो-तो चतुर्दशी को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को सफेद
रेशमी वस्त्र पर रखकर सफेद चन्दन से तिलक करें फिर भगवान् मृत्युंजय से अपने स्वास्थ्य रक्षा का निवेदन करें और यथाशक्ति महामृत्युंजय
मंत्र का जप करें तथा पाठ के बाद छह चक्र उठाकर किसी निर्जन स्थान पर जाकर तीन चक्रों को अपने ऊपर से उतारकर अपने पीछे फेंक दें 
और पीछे देखे बिना वापस आ जायें बाकि बचे तीन चक्रों को किसी शिव मन्दिर में भगवान् शिव का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर अर्पित कर
दें और प्रणाम करके घर आ जायें-घर आकर चार चक्रों को चांदी के तार में बांधकर अपने पंलग के चारों पायों पर बांध दें तथा शेष बचे एक को
ताबीज का रुप देकर गले में धारण करें।  

यदि आपके बच्चे अथवा परिवार के किसी सदस्य को जल्दी-जल्दी नजर लगती हो तो आप शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि को 11 अभिमंत्रित गोमती
चक्र को घर के पूजा स्थल में मां दुर्गा की तस्वीर के आगे लाल या हरे रेशमी वस्त्र पर स्थान दें,फिर रोली आदि से तिलक करके नियमित रुप से
मां दुर्गा को 5 अगरबत्ती अर्पित करें अब मां दुर्गा का कोई भी मंत्र जप करें-जप के बाद अगरबत्ती के भभूत से सभी गोमती चक्रों पर तिलक करें 
नवमी को तीन चक्र पीड़ित पर से उसारकर दक्षिण दिशा में फेंक दें और एक चक्र को हरे वस्त्र में बांधकर ताबीज का रुप देकर मां दुर्गा की तस्वीर
के चरणों से स्पर्श करवाकर पीड़ित के गले में डाल दें-बाकि बचे सभी चक्रों को पीड़ित के पुराने धुले हुए वस्त्र में बांधकर अलमारी में रख दें।  

यदि आपको नजर जल्दी लगती हो तो पाँच गोमती चक्र लेकर किसी सुनसान स्थान पर जायें फिर तीन चक्रों को अपने ऊपर से सात बार उतारकर
अपने पीछे फेंक दें तथा पीछे देखे बिना वापस आ जायें - बाकी बचे दो चक्रों को तीव्र प्रवाह के जल में प्रवाहीत कर दें।  

यदि आपका बच्चा अधिक डरता हो-तो शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को हनुमान् जी के मन्दिर जाकर एक अभिमंत्रित गोमती चक्र पर श्री हनुमानजी
के दाएं कंधे के सिन्दूर से तिलक करके प्रभु के चरणों में रख दें और एक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें-फिर गोमती चक्र उठाकर लाल कपड़े 
में बांधकर बच्चे के गले में डाल दें । 

यदि आप कितनी भी मेहनत क्यों न करें परन्तु आर्थिक समृद्धि आपसे दूर रहती हो और आप आर्थिक स्थिति से संतुष्ट न होते हों, तो शुक्ल पक्ष
के प्रथम गुरुवार को 21 अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर घर के पूजा स्थल में मां लक्ष्मी व श्री विष्णु की तस्वीर के समक्ष पीले रेशमी वस्त्र पर स्थान 
दें फिर रोली से तिलक कर प्रभु से अपने निवास में स्थायी वास करने का निवेदन तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करके हल्दी की माला से 
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"मंत्र की तीन माला जप करें-इस प्रकार सवा महीने जप करने के बाद अन्तिम दिन किसी वृद्ध तथा 9 वर्ष से कम आयु 
की एक बच्ची को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करें। 

यदि व्यवसाय में किसी कारण से आपका व्यवसाय लाभदायक स्थिति में नहीं हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को 3 गोमती चक्र, 3 कौड़ी व 3 हल्दी
की गांठ को अभिमंत्रित कर किसी पीले कपड़े में बांधकर धन-स्थान पर रखें। 

यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को 21 अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल रेशमी वस्त्र में 
बांधकर धन रखने के स्थान पर रखकर हल्दी से तिलक करें फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए उस पोटली को लेकर सारे घर में घूमते हुए घर के 
बाहर आकर किसी निकट के मन्दिर में रख दें। 

यदि आप अधिक आर्थिक समृद्धि के इच्छुक हैं तो अभिमंत्रित गोमती चक्र और काली हल्दी को पीले कपड़े में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखें। 

यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है भले ही वह किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ही क्यों न हो तो शुक्रवार को 21 अभिमन्त्रित गोमती चक्र
लेकर पीले या लाल वस्त्र पर स्थान देकर धूप-दीप से पूजा करें अगले दिन उनमें से चार गोमती चक्र उठाकर घर के चारों कोनों में एक-एक गाड़ दें
-13 चक्रों को लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें और शेष किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ प्रभु को अर्पित कर दें। 

यदि आपके गुप्त शत्रु अधिक हों अथवा किसी व्यक्ति की काली नज़र आपके व्यवसाय पर लग गई हो तो 21 अभिमंत्रित गोमती चक्र व तीन लघु 
नारियल को पूजा के बाद पीले वस्त्र में बांधकर मुख्य द्वारे पर लटका दें। 

गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं-सात गोमती चक्रों को
शुक्ल पक्ष के प्रथम अथवा दीपावली पर लाल वस्त्र में अभिमंत्रित कर पोटली बना कर धन स्थान पर रखें । 

व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि 
होती है। 

धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें-उनके सामने श्री नम: का जप करें-इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें
बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी । 

यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है। 

यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।  

चाँदी में जड़वाकर बच्चे के गले में पहना देने से बच्चे को नजर नहीं लगती तथा बच्चा स्वस्थ बना रहता है । 

यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर से घुमाकर आग में डाल दे तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव
समाप्त हो जाता है । 

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बुधवार, 9 नवंबर 2016

तुलसी असाध्य रोगों को भी जड़ से खत्म करने में सक्षम और तुलसी के महत्वपूर्ण औषधीय उपयोगी गुण

तुलसी अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पौधा है। इसके सभी भाग अलौकिक शक्ति और तत्वों से परिपूर्ण माने गए हैं। तुलसी के पौधे से निकलने वाली सुगंध वातावरण को शुध्द रखने में तो अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती ही है, भारत में आयुर्वेद चिकित्सा पध्दति में भी तुलसी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। तुलसी का सदियों में औषधीय रूप में प्रयोग होता चला आ रहा है।

तुलसी दल का प्रयोग खांसी, विष, श्वांस, कफ, बात, हिचकी और भोज्य पदार्थों की दुर्गन्ध को दूर करता है। इसके अलावा तुलसी बलवर्ध्दक होती है तथा सिरदर्द स्मरण शक्ति, आंखों में जलन, मुंह में छाले, दमा, ज्वर, पेशाब में जलन व विभिन्न प्रकार के रक्त व हृदय संबंधी बीमारियों को दूर करने में भी सहायक है। तुलसी में छोटे-छोटे रोगों से लेकर असाध्य रोगों को भी जड़ में खत्म कर देने की अद्भुत क्षमता है। इसके गुणों को जानकर और तुलसी का उचित उपयोग कर हमें अत्यधिक लाभ मिल सकता है।

तुलसी के महत्वपूर्ण औषधीय उपयोगी एवं गुणों पर एक नजर :-

* श्वेत तुलसी बच्चों के कफ विकार, सर्दी, खांसी इत्यादि में लाभदायक है।

* कफ निवारणार्थ तुलसी को काली मिर्च पाउडर के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।

* गले में सूजन तथा गले की खराश दूर करने के लिए तुलसी के बीज का सेवन शक्कर के साथ करने से बहुत राहत मिलती।

* तुलसी के पत्तों को काली मिर्च, सौंठ तथा चीनी के साथ पानी में उबालकर पीने में खांसी, जुकाम, फ्लू और बुखार में फायदा पहुंचता    है।

* पेट में दर्द होने पर तुलसी रस और अदरक का रस समान मात्रा में लेने से दर्द में राहत मिलती है। इसके उपयोग से पाचन क्रिया में भी सुधार होता है।

* कान के साधारण दर्द में तुलसी की पत्तियों का रस गुनगुना करके डाले।

* नित्य प्रति तुलसी की पत्तियां चबाकर खाने से रक्त साफ होता है।

* चर्म रोग होने पर तुलसी के पत्तों के रस के नींबू के रस में मिलाकर लगाने से फायदा होता है।

* तुलसी के पत्तों का रस पीने से शरीर में ताकत और स्मरण शक्ति में वृध्दि होती है।

* प्रसव के समय स्त्रियों को तुलसी के पत्तों का रस देन से प्रसव पीड़ा कम होती है।

* तुलसी की जड़ का चूर्ण पान में रखकर खिलाने से स्त्रियों का अनावश्यक रक्तस्राव बंद होता है।

* जहरीले कीड़े या सांप के काटने पर तुलसी की जड़ पीसकर काटे गए स्थान पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है।

* फोड़े फुंसी आदि पर तुलसी के पत्तो का लेप लाभदायक होता है।

* तुलसी की मंजरी और अजवायन देने से चेचक का प्रभाव कम होता है। 

* सफेद दाग, झाईयां, कील, मुंहासे आदि हो जाने पर तुलसी के रस में समान भाग नींबू का रस मिलाकर 24 घंट तक धूप में रखे। थोड़ा गाढ़ा होने पर चेहरे पर लगाएं। इसके नियमित प्रयोग से झाईयां, काले दाग, कीले आदि नष्ट होकर चेहरा बेदाग हो जाता है।

* तुलसी के बीजों का सेवन दूध के साथ करने से पुरुषों में बल, वीर्य और संतोनोत्पति की क्षमता में वृध्दि होती है।

* तुलसी का प्रयोग मलेरिया बुखार के प्रकोप को भी कम करता है।

* तुलसी का शर्बत, अबलेह इत्यादि बनाकर पीने से मन शांत रहता है।

* आलस्य निराशा, कफ, सिरदर्द, जुकाम, खांसी, शरीर की ऐठन, अकड़न इत्यादि बीमारियों को दूर करने के लिए तुलसी की जाय का सेवन करें।

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मंगलवार, 8 नवंबर 2016

तुलसी के पौधे से दूर करे वास्तु दोष - TULSI KE PAUDHE SE DUR KARE VASHTU DOSH





वास्तु दोष को दूर करने के लिए तुलसी के पौधे अग्नि कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व से लेकर वायव्य उत्तर-पश्चिम तक के खाली स्थान में लगा सकते है यदि खाली जमीन ना हो तो गमलों में भी तुलसी को स्थान दे कर सम्मानित किया जा सकता है. 

तुलसी का गमला रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह समाप्त होती है पूर्व दिशा की खिडकी के पास रखने से पुत्र यदि जिद्दी हो तो उसका हठ दूर होता है यदि घर की कोई सन्तान अपनी मर्यादा से बाहर है अर्थात नियंत्रण में नहीं है तो पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे में से तीन पत्ते किसी ना किसी रूप में सन्तान को खिलाने से सन्तान आज्ञानुसार व्यवहार करने लगती है. 

कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो अग्नि कोण में तुलसी के पौधे को कन्या नित्य जल अर्पण कर एक प्रदक्षिणा करने से विवाह जल्दी और अनुकूल स्थान में होता है सारी बाधाए दूर होती है. 

यदि कारोबार ठीक नहीं चल रहा तो दक्षिण-पश्चिम में रखे तुलसी कि गमले पर प्रति शुक्रवार को सुबह कच्चा दूध अर्पण करे व मिठाई का भोग रख कर किसी सुहागिन स्त्री को मीठी वस्तु देने से व्यवसाय में सफलता मिलती है।

नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो ऑफिस में खाली जमीन या किसी गमले आदि जहाँ पर भी मिटटी हो वहां पर सोमवार को तुलसी के सोलह बीज किसी सफेद कपडे में बाँध कर सुबह दबा दे सम्मन की वृद्धि होगी. नित्य पंचामृत बना कर यदि घर कि महिला शालिग्राम जी का अभिषेक करती है तो घर में वास्तु दोष हो ही नहीं सकता । 


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तुलसी का पौधा बता देगा, आप पर कोई मुसीबत आने वाली है,इस पोस्ट को एक बार ज़रूर पढ़ें और शेयर करना ना भूले





तुलसी का पौधा बता देगा, आप पर कोई मुसीबत आने वाली है।सभी मित्रों के लिए महत्वपूर्ण है । 

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आपके घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखने लगता है। तुलसी का पौधा ऐसा है जो आपको पहले ही बता देगा कि आप पर या आपके घर परिवार को किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। 

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार माना जाए तो ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है। क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नही होता।

 अगर ज्योतिष की माने तो ऐसा बुध के कारण होता है। बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़ पौधों का कारक ग्रह माना जाता बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है। अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा उत्तरोत्तर बढ़ता रहता है। बुध के प्रभाव से पौधे में फल फूल लगने लगते हैं।प्रतिदिन चार पत्तियां तुलसी की सुबह खाली पेट ग्रहण करने से मधुमेह, रक्त विकार, वात, पित्त आदि दोष दूर होने लगते है मां तुलसी के समीप आसन लगा कर यदि कुछ समय हेतु प्रतिदिन बैठा जाये तो श्वास के रोग अस्थमा आदि से जल्दी छुटकारा मिलता है.

घर में तुलसी के पौधे की उपस्थिति एक वैद्य समान तो है ही यह वास्तु के दोष भी दूर करने में सक्षम है हमारें शास्त्र इस के गुणों से भरे पड़े है जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आती है यह कभी सोचा है कि मामूली सी दिखने वाली यह तुलसी हमारे घर या भवन के समस्त दोष को दूर कर हमारे जीवन को निरोग एवम सुखमय बनाने में सक्षम है माता के समान प्रदान करने वाली तुलसी का वास्तु शास्त्र में विशेष स्थान है हम ऐसे समाज में निवास करते है कि सस्ती वस्तुएं एवम सुलभ सामग्री को शान के विपरीत समझने लगे है महंगी चीजों को हम अपनी प्रतिष्ठा मानते है कुछ भी हो तुलसी का स्थान हमारे शास्त्रों में पूज्यनीय देवी के रूप में है तुलसी को मां शब्द से अलंकृत कर हम नित्य इसुख सकी पूजा आराधना भी करते है इसके गुणों को आधुनिक रसायन शास्त्र भी मानता है इसकी हवा तथा स्पर्श एवम इसका भोग दीर्घ आयु तथा स्वास्थ्य विशेष रूप से वातावरण को शुद्ध करने में सक्षम होता है शास्त्रानुसार तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधे मिलते है उनमें श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी मुख्य रूप से विद्यमान है सबके गुण अलग अलग है शरीर में नाक कान वायु कफ ज्वर खांसी और दिल की बिमारिओं पर खास प्रभाव डालती है.

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रविवार, 6 नवंबर 2016

ट्रेक्किग इन उत्तराखंड - TREKKING TO SOURCE OF THE GANGA

SOURCE OF THE GANGA

भारत में गंगा में एक पौराणिक कथा है, एक कहानी और अपने पाठ्यक्रम के हर दूसरे कदम पर एक धारणा यह से जुड़ी है और गंगोत्री ग्लेशियर पर अपने स्रोत है अलग नहीं है। गौमुख (गाय के मुंह) जहां गंगा निकलती से भी एक तीर्थ मूल्य और एक किंवदंती से जुड़ी है। यह कहा जाता है कि राजा भगीरथ गंगा स्वर्ग से यहां नीचे मिला है, ताकि मोक्ष अपने बेटों के लिए खरीदा जा सकता है। इसकी हिमलंब गंगोत्री ग्लेशियर के साथ यह सच है या नहीं गौमुख हर पैदल चलने और साहसी, जो पसंद के सबसे जहां एक भी भागीरथी चोटियों की एक शानदार दृश्य देखने के लिए हो जाता है से शिवलिंग चोटी के आधार पर शिविर सही करने के लिए गौमुख बिंदु से आगे जाने के लिए एक चुनौती है ।



दिनों की संख्या: 08-09 दिन
Catagotry: मध्यम साहसिक
क्षेत्र उत्तराखंड, भारत
  • तपोवन आधार शिविर
  • भागीरथी और शिवलिंग पहाड़ 6500m
  • गंगोत्री Shrine- प्रसिद्ध तीर्थ 4 में से एक
  • साधु / संतों की जीवन शैली के साथ इंटरेक्शन
  • गंगा गोमुख के स्रोत के एक महान विचारों
  • सबसे अच्छा समय जाने के लिए : मई जून अंत तक, सितम्बर नवम्बर तक
  • उच्चतम बिंदु 4500m
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ट्रेक्किग-TREKKING - यमुनोत्री से डोडिताल ट्रेक - TREKKING IN UTTRAKHAND

उत्तराखंड जो पूर्व में उत्तरांचल के रूप में जाना जाता था भारत के उत्तरी भाग में एक राज्य है। राज्य पर्वत श्रृंखला और शानदार घाटियों से भरा है। दर्शक को ट्रेकर्स(trekkers) के लिए करने के लिए स्थानों में से कुछ किन्नौर को Pubin दर्रा(Pubin pass), दोदो ताल यमुनोत्री के लिए(Dodo Tal to Yamunotri), गंगा के स्रोत(Source of Ganges), हेम कुंड(Hem Kund), फूलों की घाटी(Valley of the flowers), Kuari दर्रा(Kuari Pass) और पिंडारी ग्लेशियर(Pindari Glacie) आदि कर रहे हैं.



YAMUNOTRI TO DODITAL TREK

डोडिताल (Dodital) उत्तराखंड, भारत में ताजे पानी की झील, 3,024 मीटर (9,921 फुट) की ऊंचाई पर स्थित है। लोकप्रिय कथाओं में से एक के अनुसार भगवान गणेश ने अपने निवास के रूप में इस जगह को चुना। वहाँ भी एक मंदिर यहां भगवान गणेश को समर्पित है। इस झील के लिए एक और नाम है, जिसका अर्थ Ganesh Ka ताल या गणेश की झील 'dhundital' है। मानव चट्टी से Dodital ट्रेक जो Yamnotri घाटी में है। यमुनोत्री में यमुना नदी के स्रोत और हिंदू धर्म में देवी यमुना जी बिराजमान  है। यह गढ़वाल हिमालय में 3,293 मीटर (10,804 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग 30 किलोमीटर (19 मील) उत्तरकाशी के उत्तर में स्थित है। यह भारत के चार धाम तीर्थयात्रा में चार साइटों में से एक है।



दिनों की संख्या: 06 दिन 
श्रेणी: मध्यम साहसिक 
क्षेत्र : उत्तराखंड, भारत 

           * यमुनोत्री श्राइन (Yamnotri shrine) 
           * द्वारा टॉप ( Drawa Top)
           * डोडिताल झील (Dodital Lake)
           * उच्चतम बिंदु 4000m 
           * सबसे अच्छा समय जाने के लिए: मई जून अंत तक, सितम्बर मध्य नवम्बर तक
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